हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के प्रतिनिधि से बातचीत करते हुए इमाम ख़ुमैनी (रह.) शैक्षिक एवं शोध संस्थान के प्रमुख आयतुल्लाह महमूद रजब़ी ने सर्वोच्च नेता के उस संदेश का उल्लेख किया, जो उन्होंने पवित्र रक्षा सप्ताह के अवसर पर जारी किया था। इस संदेश में उन्होंने कहा था कि “ईश्वरीय गणनाओं के अनुसार, ईरान दुनिया की पहली शक्ति है।”
आयतुल्लाह रजब़ी ने कहा कि हमारे धार्मिक और कुरआनी दृष्टिकोण के अनुसार, भौतिक साधनों के अतिरिक्त भी ऐसे कारक मौजूद हैं, जो सफलता और शक्ति प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विश्व स्तर पर हम इन कारकों के प्रभाव स्पष्ट रूप से देख सकते हैं। इनमें ईश्वर की अदृश्य सहायता भी शामिल है, जिसका उल्लेख पवित्र कुरआन की अनेक आयतों में किया गया है।
उन्होंने आगे कहा कि हाल ही में थोपी गई दोनों लड़ाइयों में अमेरिकी और ज़ायोनी दुश्मन के मुकाबले ईरानी जनता को ईश्वर की सहायता मिलते हुए हमने अपनी आँखों से देखा है।
मजलिस-ए-ख़ुबरेगान-ए-रहबरी की कार्यकारिणी के सदस्य आयतुल्लाह रजब़ी ने कहा कि ये ईश्वर के निर्धारित नियम हैं। हमने यह सीखा है कि यदि हम ईश्वर और उसके धर्म की सहायता करेंगे, तो हमें भी उसकी मदद प्राप्त होगी।
उन्होंने कहा कि इसके विपरीत, सांसारिक दृष्टिकोण सभी प्रभावशाली कारकों को केवल भौतिक साधनों तक सीमित मानता है, जबकि धार्मिक और ईश्वरीय दृष्टिकोण के अनुसार भौतिक साधनों के साथ-साथ अभौतिक कारक भी प्रभाव डालते हैं। इस सच्चाई को समझने के लिए पवित्र कुरआन के प्रकाश में पैग़म्बरे इस्लाम (स.) और अन्य ईश्वरीय पैग़म्बरों के जीवन का अध्ययन किया जा सकता है।
आयतुल्लाह रजब़ी ने कहा कि पवित्र कुरआन स्पष्ट करता है कि कई बार भौतिक संसाधनों और सैन्य शक्ति के लिहाज़ से कमजोर समूहों ने अपने से अधिक शक्तिशाली दुश्मनों पर विजय प्राप्त की। कुरआन की आयतों के अध्ययन से पता चलता है कि कुछ अवसरों पर पैग़म्बरे इस्लाम (स.) की सेना की संख्या दुश्मन की सेना की तुलना में आधी, बल्कि एक-तिहाई तक होती थी। इसके बावजूद ईश्वर की इच्छा और सहायता से उन्हें विजय प्राप्त हुई। विभिन्न युद्धों में ईमान वालों को ईश्वरीय सहायता मिली।
उन्होंने आगे कहा कि जिस तरह हमारे प्रिय रहबर ने फरमाया है, यदि हमारा ध्यान ईश्वर की ओर बना रहे और हम हज़रत मासूमीन (अ.) से तवस्सुल करें, तो हमें एक मजबूत सहारा प्राप्त होगा। इसकी मदद से हम तमाम गैर-ईश्वरीय शक्तियों पर विजय हासिल कर सकते हैं और दुनिया की ऐसी विशिष्ट महाशक्ति बन सकते हैं, जिसका कोई मुकाबला न कर सके।
आपकी टिप्पणी